Muslims set up half-a-dozen camps for kanwarias in Purkazi win hearts

सावन में कांवड़ यात्रा के बीच मुजफ्फरनगर में सामाजिक एकता और सद्भाव का अद्भूत संगम देखने को मिल रहा है। कभी सांप्रदायिक हिंसा को लेकर चर्चा में रहा यह जिला इस सावन पूरी तरह से भगवान शिव की भक्ति में डूबा दिख रहा है। कांवड़ यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं की सेवा के लिए हिंदुओं के साथ- साथ मुस्लिमों ने भी कैंप लगाए हैं। दोनों ही समुदाय के लोग इन कैंपों के जरिए कांवड़ियों को हर तरह से सेवा करने के लिए आतुर दिख रहे हैं।

मुजफ्फरनगर में इस समय कई सामाजिक संस्थाओं के बैनर तले कांवड़ियों के अलग- अलग कैंप लगे हैं। इनमें पैगाम-ए-इंसानियत, सेक्युलर फोर्ट, वेलफेयर सोसाइटी जैसे कई नाम शामिल हैं। मुस्लिम समुदाय के लोग भी इनमें बढ़चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। खाने से लेकर कांवड़ियों के लिए दवा और अन्य जरूरी सुविधाएं इन कैंपों में उपलब्ध कराई जा रही हैं।
‘दो दशकों से हम ऐसा कर रहे’
एक संस्था से जुड़े असद फारूकी कहते हैं, ‘मुजफ्फरनगर के मुस्लिम सभी धर्मों का सम्मान करते हैं। हम समाज में शांति और प्यार का पैगाम बांटना चाहते हैं।’ वहीं पैगाम-ए-इंसानियत के संस्थापक और समाजसेवी आसिफ राही कहते हैं, ‘यह यहां कोई नई चीज नहीं है। हम दो दशक से कांवड़ियों के लिए इस तरह के कैंप लगा रहे हैं। 2013 के दंगों के बाद हमें लगा कि दोनों समुदायों को करीब लाने के लिए अब हमारी जिम्मेदारी और बढ़ गई है।’

‘इस यात्रा से पहले मन में गलत धारणा थी’
इन कैंपों में सेवा प्राप्त करने के बाद उत्साहित श्रद्धालु मोहित सिंह कहते हैं, ‘मेरे मन में मुजफ्फरनगर को लेकर एक गलत धारणा दी। अच्छा हुआ कि इस बार मैं कांवड़ यात्रा पर निकला और इन लोगों के बीच पहुंचा। आज मुझे लगा कि मैं कितना गलत था।’

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